Monday, December 26, 2011

ये दिसंबर बड़ा ही इम्पार्टेंट मंथ है .................

जब अलसाई हुई सुबह देर तक धुंध की चादर ताने  सोने की जिद्द करती रहे......और शाम सात बजे के बाद से ही डोंट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा कर ,कोहरा ओढ़ कर सो जाए तब समझ लेना चाहिए की दिसंबर आ गया है .जब चौराहों पर चाय की दुकानों में सेल का  माहौल हो , बिना सिगरेट के मुंह से धुआं निकलने लगे और आदमी सुबह शाम खुद-ब-खुद माइकल जैक्शन जैसा थिरकने लगे तब जान  लेना चाहिए की ये दिसंबर का असर है ,ऐसे ही कई सारे सिग्नल हैं जिनसे पहचाना जा सकता है कि दिसंबर आ गया है ,
दिसंबर आते ही दिमाग में मोबाइल की रिंगटोन की तरह जावेद अख्तर का गाना....ए जाते हुए लम्हों जरा ठहरो! जरा ठहरो! मैं भी तो चलता हूँ ....बजने लगता है और हम दिसंबर के साथ चल देते है अपने बीते साल को इवैलुएट करते हुए , लेकिन वक़्त जिस दरवाजे से बहार निकलता है उसी से  इंटर भी करता है ...इसलिए उस दरवाजे की एक ओर बीतने वाला साल दिसंबर बन कर खड़ा होता है तो दूसरी ओर आने वाला साल जनवरी के गेटअप में अपनी बारी का इन्तजार करता रहता है,जैसे ही हम दिसंबर को सी आफ(see off )करते है वैसे ही जनवरी हमारा हाँथ थाम कर  विद्या बालन स्टाइल में कहती है '' अपने बीते हुए साल की कैंडल्स को फूंक मारो और आने वाले साल को बोलो हैप्पी बर्थडे ! हमारे मुंह से उस वक़्त बस एक शब्द निकलता  है ''बुम्बाट'' और हम यूथ अपना वही पुराना स्लोगन "जवानी टेस्ट करने के लिए होती है वेस्ट करने के लिए नहीं " याद करते हुए जुट जाते है जश्न मनाने में ,
इन सब के साथ-साथ जो दिसंबर में सबसे ज्यादा करने का मन करता है वो है रीजोलुशन पास करने का,हर एक यूथ साल के अंतिम महीने में कोई न कोई रीजोलुशन जरूर पास करता है ये और बात है की उनमे  से ज्यादा तर नए साल के पहले ही दिन टूट जाते है  जो कुछ बचते है तो वो जनवरी जाते-जाते शहीद हो जाते है,पूरा होने  वाले रीजोलुशनस की  संख्या १ % होती है ,पर जो लोग अपना रीजोलुशन पूरा कर लेते है वो कमाल कर देते है, मुझे इस मौके पर अपने दो दोस्तों की कहानी याद आ रही है जो की रीजोलुशन से ही जुडी है,
मेरा एक दोस्त था हर साल दिसंबर के महीने में अपनी सारी बैड हबिट्स बढ़ा देता था मसलन सिगरेट पीना,क्लास बँक मरना ,देर तक सोना,फिजूल खर्ची करना ,और हर वो बुरी आदत जो भी उसे छोडनी  चाहिए थी  ,बस पूछने पर कहता था ''नेक्स्ट इयर से ये सब छोड़ रहा हूँ यार सो अंतिम बार जी भर कर कर लूं''. वो दिसंबर लास्ट डे टाइमटेबल ड्राफ्ट करता था, अपनी सारी बुरी आदतों को लिख कर छोड़ने की कसम खाता था पर  न्यू इयर की पार्टी से ही जो रेजोलुशन  तोड़ने जो सिलसिला शुरू होता था ,वो फिर साल के अंतिम दिन ही रुकता था यही सिलसिला चलता रहा और आज वो इंटर तक की ही पढ़ाई बड़ी मुश्किल से कर पाया है,मेरा जो दूसरा दोस्त था वो गाँव से आया था उसे इंग्लिश नहीं आती थी इसलिए उसे टीचर का पढाना समझ नहीं आता था वो बहुत परेशान रहता था ,मुझे आज भी याद है की साल का अंतिम  दिन था कोचिंग में मैथ्स की क्लास के बाद पार्टी थी,हम सब पढ़ रहे थे और टीचर की पढ़ाई कोई बात शायद मेरे उस फ्रेंड को नहीं समझ आई सो  उसने टीचर से पुछा तो उन्होंने उसे डांट दिया और कहा की बिना इंग्लिश के पढ़ाई नहीं हो सकती ,तुम पढ़ाई छोड़ दे ,तुम  कभी इंजीनियर नहीं बन पाओगे ,उसे ये बात लग गयी वो उस दिन वो पार्टी में भी नहीं रुका और सीधे घर चला गया ,उसने रीजोलुशन पास किया की मैं इंग्लिश बोल कर दिखाऊंगा ,मैं इंजिनीयर बन कर दिखाऊंगा,ये उसके रीजोलुशन का ही असर था की वो छ:महीने के भीतर फ्लूएंट इंग्लिश बोलने लगा था ,और वो मात्र एक लड़का था जिसे हमारी कोचिंग से आई आई टी में सेलेक्शन मिला ,जिस टीचर ने उसे डांटा था वो उसके साथ फोटो खिचवाने के लिए परेशान था ,जो लड़का कल तक उनकी नज़र ने इंजीनियर बनने के काबिल नहीं था वो आज उसे अपनी कोचिंग का ब्रांड अम्बेसडर कह रहे थे,ये सारा कमाल उसके सच्चे रीजोलुशन का था ,

ये दिसंबर बड़ा ही इम्पार्टेंट मंथ है इसमें  हमें अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में सोचना है और एक सच्चा रीजोलुशन पास करना है उसे पूरा करने के लिए अपनी  पूरी ताकत लगा देनी है,हमें खुद को एक नयी पहचान देनी है ,नयी स्टाइल में काम करना है ,लोगों को चौका देना है ,जो लोग हमें बेकार,निक्कम्मा कहते है उनके मुह से हमें काबिल और होनहार सुनना है,ये सरे कमाल हो सकते है जरूरत है तो बस सच्चे रीजोलुशन की ,
नया साल आ रहा है दिसंबर कब कोहरे के परदे के पीछे ड्रेस चेंज करके जनवरी हो जायेगा पता ही नहीं चलेगा,हम पार्टी मनाये जश्न मनाये ,पर अपने रीजोलुशन को न भूल जायें ,एक भी पल हमारे दिलो दिमाग से वो टारगेट नहीं हटना चाहिए जो हम इस दिसंबर में सेट करने वाले है,हमें जिन्दगी को महसूस करना सीखना होगा वरना जिंदगी मायूस हो जाएगी और आप जानते ही है की जिन्दगी जब मायूस होती है तभी महसूस होती है,तो जिन्दगी के मायूस होने से पहले महसूस करिए  नहीं तो ....वाई दिस कोलावेरी ...कोलावेरी ..कोलाबेरी डी गाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा,
                                                                     तुम्हारा --अनंत 
19 dec 2011 ko आई-नेक्स्ट (दैनिक जागरण) में प्रकाशित लेख 

लिंक यहाँ है http://epaper.inextlive.com/19671/INEXT-LUCKNOW/19.12.11#p=page:n=11:z=1
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